Pages

Thursday, May 5, 2011

इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ

इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
क्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँ,

तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ,

हम भी मजबूरियों का उज़्र करें
फिर कहीं और मुब्तिला हो जाएँ,

अब के गर तू मिले तो हम तुझसे
ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएँ,

बंदगी हमने छोड़ दी फ़राज़
क्या करें लोग जब खुदा हो जाएँ.....

No comments:

Post a Comment